Wednesday, May 26, 2010

बधाई हो - सरकार के साल पूरे.

प्रधानमंत्री महोदय बधाई हो .कुर्सी के खेल में लगातार दूसरी पारी में भी आप बहुत अच्छा खेल रहे हैं. सफ़लतापुर्वक आपकी सरकार ने एक साल पूरे किये. मोहतरमा सोनियांजी के आशीर्वाद से आप देश को स्थिर (गतिहीन) सरकार देने में सफ़ल रहे.पूरे साल नरेगा का नगारा बजता रहा. हर क्षेत्र में सरकार ने जो उपलब्धियां हासिल की---उसका श्रेय आपको जाता है. चुने हुए महान जन-प्रतिनिधियों को आपने मंत्रालय की चाबी सौंपी थी...पेरिणाम उसके अनुरुप ही रहा.

मंत्रीयों के आचरण संबंधी भूलों को माफ़ कर आपने मंत्रालयों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया. टेक्स ढांचा जिसे चिदम्बरमजी के सहयोग से आपने बनाया है,चोरी के बावजूद भी करों से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मुद्रा-कोष को प्राप्त होता रहा.बेलगाम मंहगाई बढ जाने से गरीब-उन्मुलन काफ़ी तेजी से हुआ है,भले ही गरीबी बढ रही हो.जमाखोरी के कारण देश के भीतर खाद्दान्न अधिक से अधिक संचित हुए है.मिलावट के कारण दवा-उद्योग और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है साथ ही साथ जन सामान्य को नये नये स्वाद का आनन्द प्राप्त होता है.ये सारा श्रेय आपको ही जाता है.

किसी मंत्री से परिस्थिति न संभलने पर ईश्वर में आस्था प्रगट करने से राष्ट्र के भीतर आध्यात्म का भी विकास हुआ.संपुर्ण राष्ट्र आपका ॠणी है कि आपने कभी भी विरोध की राजनीति नहीं की. भ्रष्टाचारियों, उद्दंड मंत्रीयों, घोटालेबाजो,गद्दारों सबको साथ लेकर चलते रहे.मंत्रीगणों के तो बार-बार त्यागपत्र देने पर भी आपने स्वीकार नहीं किया.एक सौ अट्ठावन लोगों की जान के बदले लखों लोगों के प्रतिनिधि मंत्री महोदय के पद की गरिमा को आपने समझा.यह उचित ही है.इससे मंत्रीयों का नैतिक स्तर काफ़ी उठा है और आपके प्रति-विश्वास भी बढा है.जनमत का आदर करते हुए आपने उन्हें पांच साल की गारंटी दे दी.चोरों-डकैतों,अपराधियों...सबके प्रति समान दृष्टि अपनाकर संवैधानिक समानता का अधिकार प्रदान करने में आपने जो उदारता दिखाई है---उसका सम्मान कौन नहीं करेगा.

भले ही संसद में पहली बार मार्शल का प्रयोग हुआ हो लेकिन महिला आरक्षण का झुनझुना राज्य-सभा में आपने बजा ही दिया. यदि अगला चुनाव भी आप जीत गये और सोनियांजी का आशीर्वाद बना रहा तो जनता आप पर विश्वास करती है लोक-सभा में भी जोरदार ढंग से राग अलापा जायेगा.महिलाओं के प्रति आपका नजरिया इतना उदार रहा है कि आपने राजपथ और जनपथ में कभी भी फ़र्क नहीं किया.बल्कि देशी से बढकर विदेशी को सम्मान देकर आप आर्थिक उदारीकरण के साथ-साथ राजनैतिक उदारीकरण के भी प्रतीक बने.सिर्फ़ एक साल में आपने वह सब कुछ कर दिखाया जिसे जनता पहले कभी नहीं देख पायी थी.जब रेल्वे प्लेटफ़ोर्म पर भगदङ में कुछ लोग मारे गये तो आपके मंत्री- महोदया ने उचित ही कहा कि मारे गये लोगों की ही गलती थी.एक ऐसा ध्रुव सत्य कि.."मरनेवाले की ही गलती होती है,मारनेवाले की नहीं" जानकर सामान्य लोगों में नैतिक व शैक्षणिक सुधार हुआ है.वे अब जान गये हैं कि आप जैसे महान नेताओं को वोट देने के अतिरिक्त अन्य सभी गलतियां लोगों से लगातार होती रहती है.

नक्सलवाद पर तो आपकी सोच इतनी अच्छी है कि विगत पचास वर्षों से ज्यादा मात्र एक साल में देश-भक्ति से भरकर जवानों ने अपनी शहादत दी है.अभी तो वायु-सेना, विदेशी सहयोग और परमाणु-अस्त्र का उपयोग होना बांकी है.यदो इसी तरह आगे चार साल आपका सुशासन चलता रहा नो निश्चय ही हम कई नये आयामों को छु लेंगे.आशा करते हैं कि आप जाते-जाते कोई रास्ता जरुर दिखाकर जायेंगे कि यदि भविष्य मे देष में गृह-युद्ध जैसी संभावना बनती है तो हम कैसे निपटें.

9 comments:

माधव said...

ए राजा , जिसने टेलीकाम में अरबो का घोटाला किया , उसको हमारे मनमोहन सिंह justify कर रहे है , मेरे दिल में मनमोहन के बारे में जो रही सही इजजजत थी वो भी चली गयी . मनमोहन सिंह भी उन बेईमान और अवसरवादी राजनेताओं की जमात में शामिल हो गए है जिसको लालू , मुलायम लीड करते है . इनमे और मनमोहन सिंह में कोई फर्क नहीं है . आतंकवाद , नक्सलवाद , महंगाई , राजनैतिक कोहराम , देश की कमजोर विदेश निति इन सभी मुद्दों पर मनमोहन बुरी तरह फेल रहे है .देश में कई करोड़ लोग अब भी गरीबी रेखा से नीचे जी रहे है और हमारे पी एम् मस्ती से जी रहे है
ये लोग नक्सली बनेंगे तो कौन जिन=मेवार है

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

'उदय' said...

... जबरदस्त अभिव्यक्ति !!!

पी.सी.गोदियाल said...

"किसी मंत्री से परिस्थिति न संभलने पर ईश्वर में आस्था प्रगट करने से राष्ट्र के भीतर आध्यात्म का भी विकास हुआ.संपुर्ण राष्ट्र आपका ॠणी है कि आपने कभी भी विरोध की राजनीति नहीं की. भ्रष्टाचारियों, उद्दंड मंत्रीयों, घोटालेबाजो,गद्दारों सबको साथ लेकर चलते रहे.मंत्रीगणों के तो बार-बार त्यागपत्र देने पर भी आपने स्वीकार नहीं किया"

Imaandaar jo thahre !

राजेन्द्र मीणा said...

अच्छा है ...हम भी उन्हें बधाई ही देंगे

kshama said...

Jahan Arundhati Roy jaise log Maowad ko Gandhiwad kah sakte hain,wahan kuchh bhi ho sakta hai!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत व्यंगात्मक बधाई दी है आपने अरविंद जी .... शब्दों के पीछे के शब्द जोरदार हैं ...

Babli said...

बहुत ही सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रूप से प्रस्तुत किया है! इस उम्दा पोस्ट के लिए बधाई!

Dr Satyajit Sahu said...

प्रधानमंत्री महोदय बधाई हो .कुर्सी के खेल में लगातार दूसरी पारी में भी आप बहुत अच्छा खेल रहे हैं.
nice post