Wednesday, May 12, 2010

सफ़ल षङयंत्र - सूरज डूबा अस्ताचल में.

सूरज डूबा अस्ताचल में,
बादलों की जीत हुई है.

वैसे थी यह सायं बेला
दिवस-देव की नियमित क्रीङा
काले मेघ बने विष-राजन
खेल रहे थे दिव्य सूर्य से.
रोक सकें वे दिव्य पथिक को
यह कब संभव है नभ तल में.
सूरज डूबा अस्ताचल में.
बादलों की जीत हुई है.

पवन-देव ईर्ष्या से ग्रसित थे.
पुत्र शनि ने कुटिल चाल की.
मेघों ने मदिरा-जल पीकर
युद्ध भूमि को घेर लिया था.
हार गया वह अंतिम पल में.
सूरज डूबा अस्ताचल में.
बादलों की जीत हुई है.

मुक्ति दिलाने क्रुरतम किरणों से
वचन दिया था सुर-असुरों ने.
करने सरिता सागर की रक्षा
देनी थी दिनकर को शिक्षा
हों जग विजयी आज पराजित
बनीं शक्ति प्रार्थना बल में
सूरज डूबा अस्ताचल में.
बादलों की जीत हुई है.

सारे जग ने मान लिया
षङयंत्र सफ़ल था कायरों का
पर अट्टहास और वज्रपात ने
जग को रौशन न कर पाया.
फ़िर से सूरज बनकर निगला
निशा रात्रि को नभ-जल-थल में.
सूरज डूबा अस्ताचल में.
बादलों की हार हुई है.

13 comments:

संजय भास्कर said...

safal sadyantre per
फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !

ललित शर्मा said...

आपकी लेखनी में धार है
जिस पर चल गयी
उसका बेड़ा पार है।

लेकिन आज आपने दो बार पोस्ट कर दिया है
हम सोचते रहे कि कहां कमेंट करें?
संजय भास्कर जी ने रास्ता दिखाया
इसलिए यहीं कमेंट कर रहे हैं
आभार

नरेश सोनी said...

बढ़िया पंक्तियां।

'उदय' said...

... दमदार !!

रश्मि प्रभा... said...

baadlon kee jeet aur baadlon kee haar... kamal hai aapki soch

Babli said...

वाह ! बहुत बढ़िया! हर एक पंक्तियाँ प्रशंग्सनीय है! लाजवाब रचना!

दिगम्बर नासवा said...

Sooraj ko haraana aasaan nahi ... roshni to aani hi hai .. koi use rok nahi sakta ... achhee rachna hai ...

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर रचना.


एक विनम्र अपील:

कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

विवादकर्ता की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

-समीर लाल ’समीर’

Shekhar Suman said...

bahut achhe...
behtareen
yun hi likhte rahein....
idhar ka bhi rukh karein...
http://i555.blogspot.com/

अरुणेश मिश्र said...

भाव उत्तम । रचना लिखो और उसे बार बार पढो , अपने आप अच्छी हो जाएगी ।

अरुणेश मिश्र said...

भाव उत्तम । रचना लिखो और उसे बार बार पढो , अपने आप अच्छी हो जाएगी ।

arvind said...

रचना लिखो और उसे बार बार पढो , अपने आप अच्छी हो जाएगी....? bhaavaarth samajha nahi.kahin yah pasand nahi aanevale rachna par kiya gaya vyang to nahi hai.? dhanyavaad