Tuesday, June 29, 2010

बेवकूफ़

बङा भाई समझदार, समृद्ध और शक्तिशाली था. वह काफ़ी पढा लिखा और बङे पद पर कार्यरत था. छोटा भाई बेरोजगार, गरीब और मूर्ख था. लोग उसका मजाक उङाया करते थे. अक्सर चौराहे पर लोगों के सामने उसकी बेवकूफ़ी पर हंसा जाता था. उसे यदि पांच रुपये और दो रुपये के सिक्कों में से एक को चुनने कहा जाता तो वह दो रुपये का सिक्का चुनता था. लोग हंसते थे और दो रुपये का सिक्का दे देते थे.
आज साझा आम के पेंङ से आम तोङा गया. चालाकी से बङे भाई ने पचास जोङी आम का एक हिस्सा और बीस जोङी का दूसरा हिस्सा बनाया. फ़िर उदारता दिखाते हुए छोटे भाई को अपना हिस्सा चुनने का हक दिया गया. छोटे भाई ने बीस जोङी आम का हिस्सा चुना और टोकरी मे भर लिया. घर आने पर बेटी ने पूछा--"बापू, जब तुम जानते हो कि पचास बीस से ज्यादा होता है तो फ़िर ऐसी बेवकूफ़ी क्यों..?".बाप ने टूटे मन से जबाव दिया--"बेटी सिर्फ़ अमीर लोग ही समझदार होते हैं. यदि मैं पचास जोङी आमवाला हिस्सा चुनता तो मुझे बीस जोङी आम भी नहीं मिलता. गरीबों को यदि अपने अधिकार का एक टुकङा भी चाहिये तो उसे बेवकूफ़ बनकर ही जीना पङता है."

11 comments:

Divya said...

How beautifully you defined a poor person's constraint.

A vital lesson taught emotionally.

वन्दना said...

क्या बात कह दी………………निशब्द कर दिया।

आचार्य जी said...

सुन्दर लेखन।

बेचैन आत्मा said...

बड़ी बात.
वाह! आनंद आ गया पढ़कर.

Udan Tashtari said...

सही कहा आपने!

निर्मला कपिला said...

यदि मैं पचास जोङी आमवाला हिस्सा चुनता तो मुझे बीस जोङी आम भी नहीं मिलता. वो क्यों नही जब दो आप्शन उसके सामने थे तो एक तो मिलना ही था । बुरा न माने इस कहानी को यहाँ से कुछ मोड दें या इस बात को सही ठहरायें कि उसे 20 वाला क्यों नही मिलता। इस को अन्यथा न लें शुभकामनायें

सूर्यकान्त गुप्ता said...

यदि मैं पचास जोङी आमवाला हिस्सा चुनता तो मुझे बीस जोङी आम भी नहीं मिलता. गरीबों को यदि अपने अधिकार का एक टुकङा भी चाहिये तो उसे बेवकूफ़ बनकर ही जीना पङता है." यह तो हुई दौलत की अमीरी की बात। लेखन, पठन, पाठन, ज्ञान आदि के मामले मे भी यही बात लागू होती है। अच्छी प्रस्तुति।

arvind said...

@ निर्मला कपिला
उसे दो ओप्सन इसलिये मिला क्योन्कि वह बेवकूफ़ था. यदि वह समझदारी दिखाता तो किसी भी तरह उसे अपना अधिकार पाने से वंचित कर दिया जाता.तब उसे बीस वाल भी नहीं मिलता.....

हमारीवाणी.कॉम said...

बढ़िया है!

थोडा सा इंतज़ार कीजिये, घूँघट बस उठने ही वाला है - हमारीवाणी.कॉम



आपकी उत्सुकता के लिए बताते चलते हैं कि हमारीवाणी.कॉम जल्द ही अपने डोमेन नेम अर्थात http://hamarivani.com के सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। आपको यह जानकार हर्ष होगा कि यह बहुत ही आसान और उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाया जा रहा है। इसमें लेखकों को बार-बार फीड नहीं देनी पड़ेगी, एक बार किसी भी ब्लॉग के हमारीवाणी.कॉम के सर्वर से जुड़ने के बाद यह अपने आप ही लेख प्रकाशित करेगा। आप सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए इसका स्वरुप आपका जाना पहचाना और पसंद किया हुआ ही बनाया जा रहा है। लेकिन धीरे-धीरे आपके सुझावों को मानते हुए इसके डिजाईन तथा टूल्स में आपकी पसंद के अनुरूप बदलाव किए जाएँगे।....

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राजकुमार सोनी said...

अरे भाई अरविन्दजी
आज तो आपने कमाल कर दिया।
इसे कहते हैं भीतर तक हिला देना।