Monday, June 14, 2010

आज का गांधी

चौबीस-पच्चीस साल का एक युवक चौराहे पर भाषण दे रहा था-"दोस्तों , भ्रष्टाचार देश की सबसे बङी समस्या है. आज इसके चलते लोगों को नौकरी नहीं मिलती, लाचारों को न्याय नहीं मिलता, गरीबों को रोटी नहीं मिलती, सरकार के खर्च होनेवाले एक रुपया में से दस पैसा भी जरुरतमंदों तक नहीं पहुंचता............सत्त के दलालों ने भ्रष्टाचार को देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है. हमें ऐसे लोगों को चौराहे पर बांधकर गोली........" तभी मंत्री महोदय के कारों का काफ़िला चौराहे से गुजर रहा था . मंत्री महोदय ने अपने एक सलाहकार से कहा----"यह युवक काफ़ी क्रांतिकारी दिखता है, बहुत ही जोरदार भाषण दे रहा है........लेकिन इसके विचारों से हिंसा की बू आ रही है. इससे जाकर मिलो. मेरी ओर से शुभकामनायें देना और गांधी के बताये रास्ते पर चलने को कहना". मंत्री महोदय के कारों का काफ़िला आगे बढ गया और सलाहकार वहीं उतरकर सीधे उस युवक के पास गया. उसने उस युवक से कहा--"मंत्रीजी ने आपको शुभकामनायें भेजा है और गांधी के बताये रास्ते पर चलने का आग्रह किया है." ऐसा कहते समय ही उसने अपनी जेब से अर्धपारदर्शी
लिफ़ाफ़ा निकालकर उस युवक के शर्ट की जेब में रख दिया. वह युवक फ़िर से भाषण देने लगा--"दोस्तों बेशक भ्रष्टाचार देश की समस्या है, लेकिन सभी समस्याओं का मूल तो नक्सलवाद और आतंकवाद है......और इन समस्याओं का निदान भी देश के भाग्य-विधाता गांधी के सत्य और अहिंसा के जरिये ही करने में सफ़ल हो रहे है.गांधी आज भी हमारे हृदयों में जिंदा हैं और देश के कोने-कोने में उन्हें सम्मान प्राप्त है."युवक के शर्ट की जेब से अर्ध पारदर्शी लिफ़ाफ़े के भीतर से हरे कागजों पर गांधी की धुंधली तस्वीर स्पश्ट दिख रही थी.

11 comments:

kshama said...

Gaandhi to ekhee tha...na bhooto na bhavishyati!

माधव said...

nice to meet

nilesh mathur said...

कमाल की लघुकथा है, बहुत प्रभाव छोडती हुई, बहुत सुन्दर!

'उदय' said...

...बहुत सुन्दर ... प्रसंशनीय,बधाई!!!!

दिलीप said...

waah sir ji antim baat to kamaal ki keh gaye...pehle kissa padha fir tippaniyan...fir socha log aapka vyang nahi samajh paaye ya main nahi samajh paya...ya fir samajhne ki zarurat nahi samjhi logo ne...

अरुणेश मिश्र said...

प्रशंसनीय ।
रोचक एवं सामयिक ।

kshama said...

"Bikare Sitare" ek jeevani hai..gar malika kee shuati kadiyan dekhen to sachtr patr parichay hai..kathanak kee mukhy kirdaar,Pooja kee tasveeren hain..uske naihar kee bhi..

बेचैन आत्मा said...

करारा कटाक्ष.
यह कथा यह भी बताती है कि कैसे देश के नेता बेरोजगार युवाओं के विचार अपने हित में परिवर्तित करने में सफल रहते हैं.
प्रेरक व चिंतनीय पोस्ट के बहुत-बहुत बधाई.

hem pandey said...

इन्हीं लाल हरे नोटों ने १५००० लोगों के हत्यारों को मात्र २ साल की सजा दिलवाई है.

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiyaa

संजय भास्कर said...

बहुत प्रभाव छोडती हुई, बहुत सुन्दर!