Monday, August 9, 2010

व्यंग्य------- वक्रतुण्ड

आज सबेरे नहा धोकर पूजा किया--"वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभा निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्व कार्येशु सर्वदा". तब मुझे पता नहीं था कि वत्रतुण्ड मेरे आज का दिन बिगाङने वाले हैं.अब तक चलो यदि बाधाएं दूर नहीं करते थे तो कम से कम बिगाङते भी नहीं थे. आज रविवार था और रविवार तो सप्ताह भर के तपस्या का फ़ल होता है. इस एक दिन कुछ समय के लिये मेरे घर के टीवी का रिमोट मेरे हाथ में हुआ करता है.मैं रिमोट लेकर बैठा और टीवी ओन कर दिया.
न्यूज आ रहा था---" आज बिलासपुर शहर के बारा खोली क्षेत्र में काफ़ी दिनों से बिमार चल रहे हाथी ने अंतिम सांस ली. मैंने चेन्ज करना चाहा.
"रुको....क्यों बदल रहे हो ?."--श्रीमतीजी ने मना किया.
"ये भी कोई न्यूज है. कोई बङी खबर देखते हैं."
"इससे बद्गकर न्यूज क्या होगा कि साक्षात गणेशजी मृत्यु लोक आकर अपना प्राणोत्सर्ग कर गये."
"अच्छा तो वे गणेशजी थे?"--मेरा यह प्रश्न श्रीमतीजी को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा.
" मानो तो देव नहीं तो पत्थर. तुम तो ये सब नहीं मानते हो इसलिये गणेशजी कभी सहाय नहीं होते.....लेकिन मैं कुछ नहीं सुनुंगी बस आज यही न्यूज चलेगा. ये गणेशजी के लिये हमारी श्रद्धांजलि होगी.."
" डार्लिंग. भारत श्रीलंका का क्रिकेट टेस्ट मैच चल रहा है. मुझे मैच देखने दो."
" क्रिकेट मैच क्या देखोगे...क्रिकेट का तो ये हाल है कि युवराज सिंह जैसे होनहार महान क्रिकेटर से ग्राउंड पर पानी मंगाकर पीते हैं सारे खिलाङी. मैंने तो कसम खा ली है जबतक मेरा युवराज वापस नहीं आयेगा मैं मैच नहीं देखुंगी"---श्रीमतीजी ने सीधा जवाब दे दिया.
" अब तो वो लाख रिवाइटल खा ले धोनी उसे बाईक पे बिठानेवाला नहीं है."
" जो भी हो..जब तक युवराज वापस नहीं होगा मेरे घर में क्रिकेट नहीं चलेगा."
" चलो ठीक है क्रिकेट नहीं पाकिस्तान के बाढ का न्यूज देखता हूं. सुना है लाखो लोग बेघर हो गये हैं."
" पहले तो कहते थे पाकिस्तानी आतंकवादी हैं. फ़िर ये हमदर्दी कबसे होने लगी?"----श्रीमती जी का प्रश्न उचित था.
"बाढ से बर्बाद हुए लोगों से मुझे हमदर्दी है चाहे वे भारत के हों या पाकिस्तान के"---मैंने भी मंजे हुए डिप्लोमेट की तरह उत्तर दिया.
" रहने दो वहां का बाढ भी वैसा ही होगा जैसा हमारे देश में होता है. जितनी तेजी से पानी बहकर चला जाता है उतनी ही तेजी से हमदर्दी और मुआवजा भी...कहां जाता है पता नहीं...बाढ का पानी और पैसा".
मैंने सोचा थोङा सा तेल लगाना अच्छा रहेगा नहीं तो आज ये काली माता मुझे गणेशजी के सिवा कुछ भी नहीं देखने देगी.
मैंने कहा---" वैसे तुम्हारा कहना बिल्कुल सही है. तुम्हारे सोच की मैं दाद देता हूं. वाह..." श्रीमतीजी मुस्कुराने लगी.मुझे एक तरह से कन्फ़र्म कर रही थी कि अब जो भी कहुंगा मान लेगी. मैने भी सोचा कि मौका देखकर अब मुझे चौका मार ही देना चाहिये.---""लोकसभा में मंहगाई पर चर्चा होनेवाली है...यही न्यूज..."
" मत करो चर्चा मंहगाई कि. लोग आजकल उसे डायन कहने लगे हैं. अब ये डायन लोक सभा में भी पहुंच गयी है तभी तो जब इसपर चर्चा होती है तांत्रिक-मंत्री लोग वहां से हट जाते हैं....मेरे घर मे डायन जोगिन की चर्चा नहीं होगी"
"स्वीटहर्ट ये वो डायन नहीं है जो तुम समझ रही हो."
"तुम नहीं समझ रहे हो ये वही डायन है. जो लोग झाङ-फ़ूक टोटका करते हैं वे इससे बच जाते हैं बांकी लोगों का तो ये डायन कलेजा ही निकाल लेती है."......श्रीमतीजी भी अपने जिद से थोङा भी पीछे हटने के लिये तैयार नहीं थी.इधर लोकल न्यूज चैनल पर मरे हुए हाथी को लोग नारियल चढा रहे थे
" ठीक है फ़िल्म कान्यूज देखते हैं..?..."
"फ़िल्म का न्यूज क्या देखोगे...मुझसे पूछो...कैटरीना ने भी सलमान से शादी के लिय हां बोल दिया है"
" उसके भी बुरे दिन आ गये हैं जो बुड्ढे से शादी कर रही है"
"ऐसा मत कहो. सलमान को कौन बुड्ढा कहेगा...वो तो अभी भी कुंवारा है."
"सलमान कुंवारा है.....????. कौन नहीं जानता है बहुत ऐश किये हैं उसने. कैटरीना को किसी जेन्टलमैन से शादी करना चाहिये जो कभी किसी बेचारी हिरण का शिकार न करे, कभी गरीबों को फ़ुटपाठ पर ना कुचले और विवेक जैसे किसी विवेकशील प्राणी को भयभीत न करे.."...मेरे पास मुद्दा तो और भी था लेकिन यह ध्यान रखना जरुरी था कि श्रीमतीजी सलमान खान के बहुत बङ फ़ैन हैं.अब कोमन्वेल्थ गेम ही बचा था.
" प्रिये...कोमन्वेल्थ गेम एक दो महिने मे होनेवाला है..."
" तो उसमे देखनेवाली बात क्या है. उसका तो नाम ही कोमन्वेल्थ गेम है.अपने देश के वेल्थ को कुछ लोग कोमन कर रहे हैं. इससे हमारा कौन सा वेल्थ बढनेवाला है. अभी प्रीकोमन्वेल्थ गेम फ़िर कोमन्वेल्थ गेम और उसके बाद पोस्ट कोमन्वेल्थ गेम . इतना सारा गेम तो कोई बेवकूफ़ ही देखना चाहेगा....."-----श्रीमतीजी मरे हुए हाथी को हाथ जोङते हुए भाषण जारी रखा----" हे गणेशजी मेरे पति को सुबद्धि देना. बेवकूफ़ी के कारण उन्होनें तुम्हारा जो अपमान किया उसके लिये उनहें अबोध समझक्र माफ़ कर देना.उनकी रक्षा करना."
मैंने झट से कहा---" जब खुद की रक्षा नहीं कर पाये तो.....".
अब अंतिम संस्कार के लिये हाथी को ट्रक पर डाला जा रहा था. श्रीमतीजी ने बताया कि लोगों ने फ़ैसला किया है कि रेलवे से भूमि लेकर हाथी का अंतिम संस्कार किया जायेगा और वहां पर गणेशजी का एक भव्य मंदिर बनाया जायेगा.इसके लिये लाखो लोगों ने दान दिया है.

चैनल लगातार यह न्यूज दिखा रही थी जिसे मेरी श्रीमतीजी पाण कर रही थी. मेरा ध्यान वक्रतुण्ड पर केन्द्रित हो गया था. कभी बाल गंगाधर तिलक ने आजादी की लङाई के लिये गणेशोत्सव की शुरुआत की थी. आज किसी बंदर के मरने पर हनुमान मंदिर और हाथी के मरने पर गणेश मंदिर आम बात हो गयी है. बीच बीच में गणेशजी दूध भी पी लिया करते हैं....ये हाल है हमारी आस्था का. आस्था और अंधविश्वास के बीच की गहरी रेखा मिट चुकी है.

9 comments:

रश्मि प्रभा... said...

aastha ya dhakosla...
bahut achha likha hai

ललित शर्मा said...

आस्था और अंधविश्वास के बीच की गहरी रेखा मिट चुकी है.

Rekha ka nam n lo mitra, nahi to somvar bhi ..........

jay hind

'उदय' said...

... बहुत सुन्दर !!!

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut umda baat likhi hai aapne

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

ajay saxena said...

बढिया पोस्ट अरविंद जी

Mithilesh dubey said...

bahut shundar bhiya

Babli said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! इस बेहतरीन और लाजवाब पोस्ट के लिए बधाई!

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

जीवन-मरण की सीमाओं मे बंधा हुआ एक नगन्य सा---यही मेर परिचय है...अरविन्द जी आपका यह
परिचय नही हैं ..आपका परिचय है..अजर अमर..अविनाशी..आनन्दमय..बस आप अपना परिचय
भूल गये हो । छह महीने के अन्दर आप अपना असली घर । सतलोक अपनी आंखो से देख सकते
हैं । और अपना असली परिचय भी जान सकते हैं और वास्तव मे इसी उद्देश्य से आप मनुष्य योमि
में आये थे पर माया के प्रभाव से भूल गये । यकीन न हो तो फ़ोन पर बात करके देख लें ।
बहुत सी बातें स्पष्ट हो जायेंगी ।
satguru-satykikhoj.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

आजकल के हालात पर अच्छी चुटकी ली है अरविंद जी .... पर ये सच है की आज आस्था नही बस अंधविश्वास रह गया है ...