Friday, February 5, 2010

भूख

"साहब, दो दिनों से घर में खाने को दाना नही है. कोई काम दे दो साहब." रामदीन साहब के सामने गिरगिरा रहा था. साहब ने कुत्ते को पुचकारते हुए जबाब दिया "एक सप्ताह और रुक जाओ, फ़िर मैं तुम्हे जरुर काम दूंगा.".रामदीन फ़िर आग्रह करने लगा " नहीं, साहब तब तक तो हम भूखे मर जायेंगे." तभी साहब ने आलमारी खोलकर उसमे से एक पांव-रोटी का पैकेट निकाला और कुत्ते की ओर फ़ेंक दिया.कुत्ता झपट्टा मारते हुए बडे चाव से पाव-रोटी खाने लगा. साहब ने कुत्ते के उपर हाथ फ़ेरते हुए मुस्कुरा कर कहा " मेरा पप्पी दो घंटे से भूखा था."रामदीन दबे पांव साहब के घर से वापस चला गया.

2 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

.... बहुत सुन्दर, बेहतरीन लघुकथा, बधाई !!!!

zeashan zaidi said...

Uf.......