सच नकाब में होता है , यहां नहीं नंगा कोई.
सबका दिल घायल घायल यहां नहीं चंगा कोई.
सच्चे प्यार - मोहब्बत पर नफ़रतों की गश्ती है.
यह इंसानों की बस्ती है यह इंसानों की बस्ती है.
बङे-बङे महलों के आगे सङकों पर बच्चे सोते हैं.
महलों में कितनी बेचैनी है ,वहां भी सारे रोते हैं.
रोटी बिकती मंहगी है पर बंदूकें काफ़ी सस्ती है.
यह इंसानों की बस्ती है यह इंसानों की बस्ती है.
सबके अपनें जात बने हैं सबका अपना मजहब है.
न कोई अपना कोई पराया , खुदी से ही मतलब है.
रुपयों में बिकता जिस्म है रुपयों से ही मस्ती है.
यह इंसानों की बस्ती है यह इंसानों की बस्ती है.
घर के दुधिया रौशन में अब चांद नहीं दिखता है.
मन के कारे बदरी में अब तो सूरज भी छिपता है.
नहीं जानता एक दिन सबकी डूबनेवाली किश्ती है.
यह इंसानों की बस्ती है यह इंसानों की बस्ती है.